Go Back Research Article January, 2026

Shiksha Me Hindu Studies Hindu Adhyayan Ki Avashyakta Aur Iska Mahatv

Abstract

अज्ञानी स्वयं का विनाश करता है | तो अधर्मी संसार को ले डूबता है | दुनिया में ढेरों विकसित और विकासशील देशों का हाल भी यही है | भारत ने विश्व को शून्य से लेकर धर्म, ज्ञान, योग, शांति, प्रेम तथा और भी ना जाने क्या-क्या दिया | आज के संसार को महज आधुनिकता, धन, नंगापन और चालाकी नहीं | वरन नैतिकता, धैर्य, विश्वाश और आपसी भाईचारे की प्रथम आवश्यकता है | क्योंकि शिक्षा महज रोजगार का साधन नहीं | वरन विश्व में सुख, शांति और तरक्की बनाए रखने वाली वो कुंजी है | जो अधर्मियों के हाथ पड़ते ही धर्मांतरण, षडयंत्र और विनाश को न्यौता देती है | याद रहे की अंततः "धर्मो रक्षति रक्षितः" अर्थात सम्पूर्ण विश्व की रक्षा तो मात्र धर्म संगत विचारधारा और प्रेम से ही होनी है | अतः युद्ध, द्वेष, अहंकार और व्यभिचार की और बढ़ते संसार को | केवल और केवल सत्य सनातन धर्म और विशुद्ध हिन्दू संस्कार ही बचा सकते है | स्पष्ट कहूँ तो, सच्चे और सहज जीवन के लिए | सम्पूर्ण विश्व को हिन्दू अध्ययन करते हुए | “वसुधैव कुटुम्बकम” अर्थात सम्पूर्ण विश्व एक ही परिवार है | इस विचार को मानना और पोषित करना होगा | आलोचक चाहे कुछ भी कहें | वैश्विक शांति और दुनिया के समग्र विकास हेतु भारत का साथ और नैतिक शिक्षाओं का अनुसरण अनिवार्य है |

Keywords

हिन्दू स्टडीज हिन्दू अध्ययन शिक्षा निति वेदपुराण धार्मिक शिक्षा मोदी सरकार हिंदुँत्व शोधपत्र
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Volume 14
Issue 4
Pages e590-e596
ISSN 2320-2882
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