Paper Title

Baloda Tehsil ke bhumi upayog evam bhumi aavaran mein parivartan ka bhaugolik soochana pranali dvara vishleshanatmak adhyayan

Keywords

  • भूमि उपयोग
  • भूमि आवरण
  • जी.आई.एस
  • परिवर्तन

Article Type

Research Article

Publication Info

Volume: 10 | Issue: 12 | Pages: c106-c112

Published On

December, 2025

Downloads

Abstract

भूमि न केवल मानवीय गतिविधियों वरन् समस्त जीव जगत के संचालन का मूल आधार स्थल है अतएव इसका उचित एवं सुसंगठित उपयोग अत्यंत मत्वपूर्ण हो जाता है। भूमि पर मानव अपनी विभिन्न सामजिक, आर्थिक क्रियाकलाप संचालित करता है जिससे वह भूमि के प्रारूप में निरंतर अपने आवश्यकता के अनुरूप परिवर्तन करते रहता है। यह अध्ययन छत्तीसगढ़ के जांजगीर चाम्पा जिले की बलौदा तहसील में 2014-2025 के मध्य भूमि उपयोग एवं भूमि आवरण (LU/LC) में आए परिवर्तनों का सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली के माध्यम से विश्लेषण है। Landsat 8 व 9 की 2014 व 2025 की इमेज का उपयोग कर क्षेत्र को पाँच श्रेणियों- वन/वनस्पति, कृषि भूमि, जल निकाय, निर्मित क्षेत्र एवं बंजर भूमि में वर्गीकृत किया गया है। अध्ययन क्षेत्र के भूमि प्रारूप में इन 11 वर्षों (2014-2025) के कालखंड में निर्मित क्षेत्र 8.267% की बढ़ोत्तरी हुई है जो अवसंरचनात्मक विकास की ओर संकेत करती है। पिछले 11 वर्षो में नए अधिवासों का निर्माण तथा परिवहन मार्गों का विस्तार तेजी से हुआ है। कृषि भूमि में 1.384% की वृद्धि हुई है। वन/वनस्पति, जल निकाय व बंजर भूमि में क्रमशः 5.253%, 27.24% व 17.45% की कमी आई है। भूमि पर मानवीय गतिविधियों के कारण पर्यावरण प्रदूषण, कृषि भूमि पर जनसंख्या का दबाव द्रुत गति से बढ़ रहा है। अतः भूमि पर अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप पर नियंत्रण तथा भूमि का नियोजित उपयोग जरुरी है।

View more »

Uploaded Document Preview