भाषा के बहाने : समकालीन भाषायी विमर्श की आलोचनात्मक समीक्षा
Abstract
यह शोध आलेख सुरेश पंत की कृति ‘भाषा के बहाने’ के आधार पर समकालीन हिंदी भाषायी विमर्श की आलोचनात्मक समीक्षा प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य भाषा को केवल संप्रेषण के साधन के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सत्ता-संबंधों, सांस्कृतिक संरचनाओं और वैचारिक प्रक्रियाओं के सक्रिय क्षेत्र के रूप में समझना है। आलेख में भाषा और सत्ता, मीडिया-भाषा, बाज़ारवाद, वैश्वीकरण तथा भाषायी लोकतंत्र के प्रश्नों के संदर्भ में पुस्तक की वैचारिक दृष्टि और आलोचनात्मक पद्धति का विश्लेषण किया गया है।
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ISSN
2456-4184